काकोरी कांड: जब क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी खजाना लूटा, मच गया था ब्रिटिश हुकूमत में हड़कंप

 

\नई दिल्ली: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में 9 अगस्त 1925 का दिन इतिहास में एक ऐसी घटना के लिए दर्ज है, जिसने ब्रिटिश हुकूमत को सीधी चुनौती दी थी। इसी दिन हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन से जुड़े 10 क्रांतिकारियों ने काकोरी के पास ट्रेन रोककर अंग्रेजी सरकार का खजाना लूट लिया था। इस घटना ने आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारी गतिविधियों को नई दिशा दी। काकोरी ट्रेन एक्शन की वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को याद किया।

ट्रेन रोककर अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटा

9 अगस्त 1925 को काकोरी रेलवे स्टेशन से रवाना हुई ट्रेन में ब्रिटिश सरकार का खजाना ले जाया जा रहा था। लखनऊ से करीब 8 मील पहले हरदोई और लखनऊ के बीच क्रांतिकारियों ने ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद सरकारी खजाने को अपने कब्जे में ले लिया गया। उस समय लूटी गई रकम करीब 8 हजार रुपये थी, जिसे उस दौर में बड़ी रकम माना जाता था।

माउजर पिस्टल से हुई फायरिंग, एक यात्री की मौत

काकोरी ट्रेन एक्शन के दौरान गोलीबारी भी हुई। क्रांतिकारियों ने जर्मनी में बनी माउजर पिस्टल का इस्तेमाल किया था। घटना के दौरान एक यात्री की मौत हो गई। ब्रिटिश शासन के लिए यह कार्रवाई बड़ा झटका थी और इससे साफ संदेश गया कि क्रांतिकारी अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने के लिए संगठित हो चुके हैं।

रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां समेत कई क्रांतिकारी निशाने पर

काकोरी कांड के बाद ब्रिटिश सरकार ने हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन से जुड़े करीब 40 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाया। कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया गया और इस मामले में लंबी कानूनी कार्रवाई चली। 1927 में अंग्रेजी सरकार ने रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई।

मदन मोहन मालवीय ने भी सजा रोकने की कोशिश की

क्रांतिकारियों को फांसी से बचाने के प्रयास भी किए गए। इनमें मदन मोहन मालवीय की कोशिशें भी शामिल थीं। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला और चारों क्रांतिकारियों को फांसी की सजा दी गई।

काकोरी कांड के बाद तेज हुई आजादी की लड़ाई

काकोरी ट्रेन एक्शन का असर सिर्फ एक सरकारी खजाना लूटने तक सीमित नहीं रहा। इस घटना ने देश में अंग्रेजी शासन के खिलाफ क्रांतिकारी भावना को और मजबूत किया। क्रांतिकारियों के साहस और बलिदान ने युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और आजादी की लड़ाई को नई ऊर्जा मिली।

अमित शाह ने क्रांतिकारियों को किया नमन

काकोरी ट्रेन एक्शन की वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह ने क्रांतिकारियों को याद करते हुए कहा कि यह स्वतंत्रता संग्राम का अविस्मरणीय अध्याय है, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय और अत्याचार के खिलाफ सशस्त्र क्रांति को नई ऊर्जा दी। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद और राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों के साहस और समर्पण को याद किया।

अमित शाह ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन के जरिए स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश शासन को यह संदेश दिया कि देश के संसाधनों पर देशवासियों का अधिकार है। उन्होंने काकोरी ट्रेन एक्शन में शामिल सभी अमर क्रांतिकारियों के प्रति देश की कृतज्ञता व्यक्त की।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा- काकोरी कांड ने आंदोलन को नई गति दी

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी काकोरी ट्रेन एक्शन की वर्षगांठ पर क्रांतिकारियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि मां भारती की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर सपूतों का बलिदान देश हमेशा याद रखेगा।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस ऐतिहासिक घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई गति और ऊर्जा दी तथा लोगों को देश की आजादी के लिए जागृत किया। उन्होंने कहा कि मातृभूमि के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों की गौरवगाथा आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

 

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